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तवांग मठ में 21 हजार से ज्यादा लोगों ने किए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन

अक्षर
तवांग मठ में 21 हजार से ज्यादा लोगों ने किए भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन

अरुणाचल प्रदेश के तवांग मठ में भगवान शाक्यमुनि बुद्ध के पवित्र अवशेषों के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। अब तक 21 हजार से अधिक लोग मठ पहुंचकर पवित्र अवशेषों के सामने प्रार्थना कर चुके हैं। तवांग के अलावा आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। यहां यह प्रदर्शनी 7 नवंबर 2026 तक आम लोगों के लिए खुली रहेगी।


इन पवित्र अवशेषों का अरुणाचल प्रदेश पहुंचना ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। करीब 13 साल बाद भगवान बुद्ध के ये अवशेष राज्य में लाए गए हैं। इन्हें नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संग्रहालय से तवांग लाया गया है। इस आयोजन के माध्यम से बौद्ध भिक्षुओं, भिक्षुणियों और आम लोगों को भगवान बुद्ध के अवशेषों के दर्शन करने तथा भारत की प्राचीन बौद्ध परंपरा से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।

इन पवित्र अवशेषों की खोज वर्ष 1898 में उत्तर प्रदेश के पिपरहवा में हुई थी। पुरातत्व के क्षेत्र में इस खोज को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। फिलहाल ये अवशेष नई दिल्ली के राष्ट्रीय संग्रहालय में सुरक्षित रखे गए हैं। बौद्ध समुदाय के लिए इनका ऐतिहासिक, पुरातात्विक और आध्यात्मिक महत्व है।

तवांग मठ में बौद्ध संस्कृति और इतिहास से जुड़ी दो विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई गई हैं। अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ (IBC) की ओर से आयोजित प्रदर्शनी 'अनअर्थिंग द सेक्रेड पिपराहवा: द स्टोरी ऑफ द होली बुद्ध रेलिक्स एंड देयर डिस्कवरी' में पवित्र अवशेषों की खोज और उनके इतिहास की जानकारी दी गई है।

वहीं, राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली की प्रदर्शनी 'क्रॉसरोड्स ऑफ धम्माः क्लासिकल लिगेसिज, लिविंग आर्ट एंड अन्थ्रॉपॉलॉजिक्ल पर्सपेक्टिव्स' के माध्यम से बौद्ध धर्म की ऐतिहासिक परंपराओं, कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया गया है।

तवांग के बाद इन पवित्र अवशेषों को 8 से 13 नवंबर 2026 तक टीजीएल मठ (लोअर गोम्पा), बोमडिला में रखा जाएगा। इसके बाद 14 से 20 नवंबर तक गोल्डन पैगोडा, नामसाई में श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। 21 नवंबर 2026 को इन्हें वापस राष्ट्रीय संग्रहालय, नई दिल्ली ले जाया जाएगा।

इस आयोजन का संचालन संस्कृति मंत्रालय की ओर से अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ और अरुणाचल प्रदेश सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत को संरक्षित करना और भगवान बुद्ध के शांति, करुणा, ज्ञान तथा विश्व बंधुत्व के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।

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