तस्वीर या आवाज को एडिट करना, बिना अनुमति इस्तेमाल और शेयर करना: प्रतिबंधित
अक्षर
डिजिटल पहचान की सुरक्षा
डीपफेक टेक्नोलॉजी से बनाए गए फर्जी वीडियो, फोटो और ऑडियो दुनिया भर में तेजी से फैल रहे हैं और इनसे आम लोगों की प्राइवेसी और पहचान पर खतरा बढ़ गया है। तस्वीर को एडिट कर निर्वस्त्र दिखाने वाला डीपफेक देशभर में डिजिटल पहचान की सुरक्षा को लेकर चर्चा शुरू हुई और अब सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है।
ऑनलाइन अपमान, बदनाम
इसका उद्देश्य लोगों को ऑनलाइन अपमान, बदनाम करने या गलत सूचना फैलाने से बचाना है। प्रस्तावित कानून के तहत किसी व्यक्ति की आवाज, चेहरा या व्यक्तिगत लक्षणों का बिना अनुमति इस्तेमाल और शेयर करना प्रतिबंधित होगा। इस कानून के बाद हर नागरिक को अपने चेहरे और आवाज पर कॉपीराइट का अधिकार मिलेगा।
डेनमार्क के संस्कृति मंत्री
याकोब एंगेल-श्मिट ने कहा कि अगर कोई प्लेटफॉर्म डीपफेक कंटेंट नहीं हटाता, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। हालांकि, कानून में आम सोशल मीडिया यूजर्स के लिए जेल का प्रावधान नहीं रखा गया है।
विशेषज्ञों का कहना
यह कदम डीपफेक और गलत सूचना के खिलाफ दुनिया में उठाए गए सबसे बड़े प्रयासों में से एक है। यानी कोई भी प्लेटफॉर्म बिना अनुमति ऐसा कंटेंट साझा नहीं कर सकेगा। जिनमें कई यूरोपीय देशों, फ्रांस और आयरलैंड ने भी इस कानून में दिलचस्पी दिखाई है।
