ईट राइट इंडिया अभियान से जंक फूड के दुष्परिणामों पर लगाम: राजस्थान
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन और मोटे अनाज (श्रीअन्न) के महत्व के बारे में जागरूक करना है, ताकि उन्हें जंक फूड के दुष्प्रभावों से बचाया जा सके।यह जन जागरूकता कार्यक्रम एक स्वस्थ पीढ़ी के निर्माण की दिशा में एक सार्थक कदम है। चिकित्सा विभाग का यह प्रयास बच्चों की खाद्य आदतों में सकारात्मक बदलाव लाकर उन्हें भविष्य के लिए स्वस्थ जीवन शैली अपनाने हेतु प्रेरित करना है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा 'ईट राइट इंडिया' (Eat Right India) अभियान के तहत एक सराहनीय पहल की गई है।भोजन से सुरक्षित जीवन
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. पुखराज साध ने बताया कि यह विशेष अभियान खाद्य सुरक्षा आयुक्त डॉ. टी. शुभमंगला के निर्देशन में चलाया गया। बुधवार को खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा स्थित टाइनी आयलैंड स्कूल, बाल आदिशा एकेडमी तथा बाल गोविंद पब्लिक स्कूल के लगभग 1,360 बच्चों को जागरूक किया गया। इस दौरान खाद्य सुरक्षा अधिकारी राकेश कुमार गोदारा, श्रवण कुमार वर्मा तथा भानु प्रताप सिंह मौजूद रहे। उन्हें सही भोजन से सुरक्षित जीवन का मंत्र दिया गया, जिसमें 'गुड फ़ूड-बेड फ़ूड' का अंतर समझाना और जंक फ़ूड के शरीर पर दुष्प्रभावों की जानकारी देना शामिल था।
फूड लेबल, एक्सपायरी डेट, और एफएसएसएआई (FSSAI) मार्क
अभियान में बच्चों को स्वस्थ भोजन की आदतों से जोड़ने और उनके दैनिक आहार में पोषक तत्वों का शरीर के लिए महत्व बताया गया। विद्यालयों के स्टाफ सदस्यों द्वारा सरल एवं रोचक तरीके से जानकारी दी गई। बच्चों को समझाया गया कि पैकेज्ड खाद्य पदार्थ खरीदते समय फूड लेबल, एक्सपायरी डेट, और एफएसएसएआई (FSSAI) मार्क को अवश्य देखें, ताकि वे सुरक्षित और मानकीकृत उत्पाद ही खरीदें। इसके साथ ही, उन्हें घर में बना ताजा भोजन, हरी सब्जियां, फल एवं मिलेट्स पर आधारित व्यंजन का अधिक से अधिक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया, जो उन्हें कुपोषण से दूर रखेगा।
ईट राइट इंडिया अभियान
डॉ. पुखराज साध ने जोर देकर कहा कि मोटे अनाज यानी 'श्रीअन्न' जैसे बाजरा, ज्वार और रागी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और ये वर्तमान समय में भारत की पोषण सुरक्षा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। ईट राइट इंडिया अभियान का लक्ष्य हर व्यक्ति को सुरक्षित, पौष्टिक और सतत आहार उपलब्ध कराना है। इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों से बच्चों में बचपन से ही सही खान-पान की आदत विकसित होती है, जो उन्हें आगे चलकर मधुमेह और मोटापा जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों से बचाने में सहायक सिद्ध होगी। यह पहल बीकानेर को एक स्वस्थ और जागरूक समाज बनाने में योगदान देगी।
























