उत्तर प्रदेश पुलिस को दहेज उत्पीड़न सहित कुल 31 मामलों में रिपोर्ट दर्ज करने पर रोक: पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा

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जिला पुलिस प्रमुखों को आदेश
उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने बताया  उत्तर प्रदेश में अब दहेज उत्पीड़न और चेक बाउंस समेत 31 मामलों में पुलिस सीधे रिपोर्ट दर्ज नहीं करेगी। इसके लिए पहले मजिस्ट्रेट के यहां मुकदमा दायर करना होगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी के बाद इस क्रम में सभी जिला पुलिस प्रमुखों को आदेश जारी किए हैं कि नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। और किसी भी तरह की लापरवाही या उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता
हाई कोर्ट के अनुसार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 219 यह प्रावधान करती है कि कोई भी कोर्ट भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 81 से 84 के तहत दंडनीय किसी अपराध का संज्ञान तब तक नहीं लेगा, जब तक कि उस अपराध से पीड़ित किसी व्यक्ति की ओर से शिकायत न की गई हो।

कानूनी विशेषज्ञों की रॉय 
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और संतुलन आएगा। इससे न केवल झूठे मामलों में कमी आएगी, बल्कि वास्तविक मामलों को भी अधिक गंभीरता से लिया जाएगा। यह भी जरूरी होगा कि मजिस्ट्रेट स्तर पर मामलों की सुनवाई तेजी से हो, ताकि पीड़ितों को अनावश्यक देरी का सामना न करना पड़े। 

पुलिस प्रमुखों को जारी आदेश 
आदेश में, घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट1881, खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम 1957, गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक (PCPNDT) अधिनियम 1994, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1950, बाल श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम 1986, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981, वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, आयात और निर्यात (नियंत्रण) अधिनियम 1947, खाद्य अपमिश्रण निवारण अधिनियम 1954, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013, ट्रेड मार्क्स अधिनियम 1999, मानव अंग और ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम 1994, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (निवारण, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम 2013, जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1974, केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम 1995, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999, कीटनाशक अधिनियम 1968, नोटरी अधिनियम 1952, बीमा अधिनियम 1938, पुरावशेष और आर्ट ट्रेजर अधिनियम 1972, औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947, खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम 2006, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम 2019, उत्तर प्रदेश गन्ना (आपूर्ति और खरीद का विनियमन) अधिनियम 1953, अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा अधिनियम 2005, दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961, बाट और माप मानक अधिनियम 1976।, से सम्बंधित मामले शामिल हैं।

झूठे गवाहों और शिकायतकर्ता पर मुकदमा
डीजीपी के जारी परिपत्र के अनुसार, झूठी सूचना देने पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 212 व 217 (पूर्व में आइपीसी की धारा 177 व 182) के तहत कार्रवाई की जाएगी। झूठी एफआईआर और गवाही देने वालों पर अब सख्त कार्रवाई होगी। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने इस संबंध में परिपत्र जारी कर सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। किसी मामले की विवेचना के बाद आरोप गलत पाए जाता हैं और पुलिस उसमें अंतिम रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) लगाती है, तो ऐसे शिकायतकर्ता और झूठे गवाहों पर अनिवार्य रूप से मुकदमा दर्ज किया जाए।
  

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