छत्तीसगढ़ के पावर प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट, तकनीकी विफलता या लापरवाही: मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
वेदांता पावर प्लांट
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुई दुर्घटना को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने इस घटना को अत्यंत दुःखद और पीड़ादायक बताते हुए हादसे में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं।
हृदयविदारक औद्योगिक त्रासदी
सक्ती जिले में एक हृदयविदारक औद्योगिक त्रासदी ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। मंगलवार दोपहर वेदांता लिमिटेड द्वारा संचालित बिजली संयंत्र में अचानक हुए एक भीषण बॉयलर विस्फोट ने देखते ही देखते मौत का तांडव मचा दिया। यह घटना तब हुई जब संयंत्र में काम कर रहे मजदूर अपनी दैनिक शिफ्ट में व्यस्त थे और किसी को आभास भी नहीं था कि पल भर में उच्च-दबाव वाली भाप मौत बनकर उन पर बरसेगी। इस दर्दनाक हादसे ने न केवल औद्योगिक सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि कई परिवारों के घर के चिरागों को भी हमेशा के लिए बुझा दिया है।
समाचार एजेंसियों को घटना की पुष्टि
रॉयटर्स और अन्य समाचार एजेंसियों को घटना की पुष्टि करते हुए सक्ती जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) प्रफुल्ल ठाकुर बताया कि बॉयलर ट्यूब के फटने से निकली करीब 600 डिग्री सेल्सियस गर्म भाप ने आसपास काम कर रहे श्रमिकों को अपनी चपेट में ले लिया। पुलिस अधीक्षक ने अपडेट देते हुए कहा, वेदांता पावर प्लांट विस्फोट में मरने वालों की संख्या बढ़कर 14 हो गई है और घायलों की संख्या 20 तक पहुँच गई है। प्रारंभिक जांच के आधार पर उन्होंने यह भी बताया कि विस्फोट संभवतः बॉयलर ट्यूब के अत्यधिक गर्म होने (overheating) के कारण हुआ, जिससे वह उच्च दबाव सहन नहीं कर पाया और फट गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार
घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका इतना जोरदार था कि पूरा परिसर धुएं और धूल के गुबार से भर गया। उस समय कई मजदूर दोपहर के भोजन के बाद अपने काम पर लौट रहे थे। पश्चिम बंगाल के एक श्रमिक अजीत नास्कर ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वे परिसर में पेंटिंग का काम कर रहे थे। अचानक एक तेज धमाका हुआ और चारों तरफ धुआं फैल गया। वे करीब 17 मीटर की ऊंचाई पर थे और जान बचाने के लिए एक अलमारी के पीछे छिप गए। हादसे के बाद प्लांट के बाहर अफरा-तफरी का माहौल देखा गया।
घटना के कारणों की गहन जांच
वेदांता लिमिटेड ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया है। कंपनी ने इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना करार देते हुए कहा कि यह हादसा सिंहितराई प्लांट की यूनिट-1 के बॉयलर में हुआ। कंपनी के अनुसार, प्रभावित होने वाले अधिकांश लोग उनके उप-ठेकेदार NGSL (NTPC GE Power Services Ltd) के कर्मचारी थे, जो इस यूनिट के संचालन और रखरखाव का कार्य संभालते हैं। वेदांता ने स्पष्ट किया कि उनकी तत्काल प्राथमिकता प्रभावितों को सर्वोत्तम चिकित्सा सहायता प्रदान करना है और वे स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर घटना के कारणों की गहन जांच कर रहे हैं।
बिलासपुर के निजी अस्पतालों में स्थानांतरित
सक्ती के कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने बताया कि स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए तुरंत बचाव दल और पुलिस बल भेजा गया था। बॉयलर को ठंडा करने के बाद ही अंदर फंसे लोगों को निकाला जा सका। अधिकांश घायलों का इलाज पड़ोसी रायगढ़ जिले के अस्पतालों में चल रहा है, जबकि कुछ गंभीर रूप से झुलसे श्रमिकों को बिलासपुर के निजी अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है। यह दुर्घटना औद्योगिक सुरक्षा के उन कड़े नियमों की याद दिलाती है जिनकी अनदेखी अक्सर निर्दोष श्रमिकों की जान पर भारी पड़ती है। कूटनीतिक और यथार्थवादी नजरिए से देखें तो यह घटना औद्योगिक गलियारों में सुरक्षा ऑडिट की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है, ताकि भविष्य में इस तरह की जानलेवा त्रुटियों को रोका जा सके।
बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है। वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घटना को अत्यंत दुखद और हृदयविदारक बताते हुए बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिवारों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की वित्तीय सहायता देने का ऐलान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कड़े लहजे में कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
























