छोटी सी मुस्कान बदल सकती है दुनिया: विश्व दयालुता दिवस
अक्षर
विश्व दयालुता दिवस
यह दिवस हमें याद दिलाता है कि दयालुता केवल एक गुण नहीं, बल्कि एक सकारात्मक जीवनशैली है। भागदौड़ और सुविधाओं से भरी दुनिया में, जब इंसान अक्सर अपनी संवेदनाओं को भूल जाता है, तब दयालुता वह शक्ति है जो हमें इंसान बनाए रखती है। इसी अमूल्य संदेश को पूरी दुनिया में फैलाने के लिए हर साल 13 नवंबर को 'विश्व दयालुता दिवस' मनाया जाता है। इसका मूल उद्देश्य लोगों को पशु, प्रकृति और अन्य मनुष्यों के प्रति दया, करुणा और मदद का भाव रखने के लिए प्रेरित करना है।
संगठन की नींव 1997 में टोक्यो, जापान
विश्व दयालुता दिवस की शुरुआत 13 नवंबर 1998 को 'वर्ल्ड काइंडनेस मूवमेंट' (WKM) नामक संगठन के तहत हुई थी। इस संगठन की नींव 1997 में टोक्यो, जापान में एक सम्मेलन के दौरान रखी गई थी। विभिन्न देशों के सामाजिक समूहों और संगठनों ने मिलकर यह फैसला लिया था कि दुनिया में प्रेम और करुणा का संदेश फैलने के लिए एक वैश्विक दिन निर्धारित होना चाहिए। 2000 के दशक में, यह आंदोलन भारत, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, सिंगापुर, यूके और यूएसए सहित कई देशों में फैल गया।
ऑक्सिटोसिन नामक हैप्पी हार्मोन
विशेषज्ञों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति दूसरों के प्रति दया दिखाता है, तो उसके शरीर में ऑक्सिटोसिन नामक 'हैप्पी हार्मोन' का स्राव बढ़ता है, जो तनाव को कम करता है। यह मानवता का आधार है, जो धर्म, जाति और देश की सीमाओं से परे होकर समाज को एक सूत्र में बांधता है। यह सकारात्मक ऊर्जा के प्रसार का माध्यम बनता है और दुनिया को एक बेहतर जगह बनाने में मदद करता है। इस दिवस का महत्व मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक एकता के लिए अत्यधिक है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक मान्यता
लोग इस दिन को अज्ञात दयालुता के कार्य (Random Acts of Kindness) करके मनाते हैं, जैसे किसी जरूरतमंद की पहचान बताए बिना मदद करना। इसके अलावा, पेड़ लगाकर प्रकृति के प्रति दयालुता दिखाना, जानवरों के लिए भोजन और पानी रखना या अपने आस-पास के बुजुर्गों से बात करना भी इसे मनाने के तरीके हैं। वर्ष 2019 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस आंदोलन को आधिकारिक तौर पर वैश्विक मान्यता मिली, जिसके बाद यह सभी देशों में और अधिक प्रोत्साहन के साथ मनाया जाने लगा।
