जग विक्रम जहाज की 20,400 मीट्रिक टन एलपीजी के साथ सुरक्षित लैंडिंग: कांडला पोर्ट गुजरात
एम वी जग विक्रम जहाज
भारतीय ध्वज वाला एलपीजी टैंकर MV जग विक्रम (MV Jag Vikram) बुधवार को गुजरात के दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA), कांडला में सफलतापूर्वक ऑयल जेटी नंबर-1 पर लग गया है। करीब 20,400 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर पहुंचा यह जहाज केवल ईंधन की खेप नहीं, बल्कि युद्ध के कारण उपजे गहरे संकट के बीच भारतीय परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है। रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में शुमार 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को पार कर इस जहाज का सुरक्षित पहुंचना, भारतीय नौसेना और समुद्री सुरक्षा प्रबंधन की एक बड़ी जीत है।
शिपिंग मंत्रालय
इस जहाज पर 24 भारतीय चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनकी सुरक्षा को लेकर सरकार और उनके परिजन चिंतित थे। शिपिंग मंत्रालय के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं। जहाज का यह मार्ग विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण था क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में कई व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने की खबरें आ रही थीं। दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (DPA) के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, MV जग विक्रम ने 11 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया था और 14 अप्रैल को कांडला पोर्ट के बाहरी इलाके में पहुंचा, जिसके बाद बुधवार सुबह इसे सफलतापूर्वक बर्थ किया गया।
आपूर्ति में कमी और बढ़ते समुद्री बीमे
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला को भी हिलाकर रख दिया है। भारत अपनी रसोई गैस (LPG) की जरूरतों का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है, और इस आयात का 90% हिस्सा खाड़ी देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है। युद्ध के कारण इस संकरे समुद्री मार्ग में जहाजों की आवाजाही बाधित होने से भारत में एलपीजी और ईंधन का बड़ा संकट पैदा हो गया है। आपूर्ति में कमी और बढ़ते समुद्री बीमे (Maritime Insurance) के कारण घरेलू रसोई गैस की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। मार्च 2026 में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, घरेलू एलपीजी सिलेंडर (14.2 किलोग्राम) की कीमत में 60 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे दिल्ली में इसकी कीमत 913 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं कमर्शियल सिलेंडरों की कीमतों में 115 रुपये की बढ़त दर्ज की गई है।
सुरक्षित गलियारे की प्रतीक्षा
होर्मुज जलडमरूमध्य की वर्तमान स्थिति और जहाजों के आगमन के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक MV जग विक्रम सहित कुल 9 भारतीय एलपीजी जहाजों ने इस खतरनाक जलमार्ग को सफलतापूर्वक पार किया है। इससे पहले ग्रीन सान्वी, ग्रीन आशा, पाइन गैस, जग वसंत, MT शिवालिक और MT नंदा देवी जैसे जहाज अपनी खेप लेकर भारतीय तटों पर पहुंचे थे। हालांकि, सरकारी सूत्रों के अनुसार, अभी भी 16 भारतीय ध्वज वाले जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं, जिनके निकलने के लिए सुरक्षित गलियारे की प्रतीक्षा की जा रही है।
भारत सरकार की बहुआयामी रणनीति
भारत सरकार इस ऊर्जा संकट से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। एक ओर जहाँ समुद्री मार्गों को सुरक्षित बनाने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, वहीं दूसरी ओर घरेलू मोर्चे पर पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के विस्तार और 5 किलोग्राम वाले छोटे एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। युद्ध के कारण ऊर्जा बाजारों में आई अस्थिरता के बावजूद, जग विक्रम जैसे जहाजों का सफल आगमन यह सुनिश्चित करता है कि देश में रसोई गैस का स्टॉक बना रहे और आने वाले हफ्तों में आपूर्ति सुचारू रूप से चलती रहे। कांडला पोर्ट पर इस जहाज का पहुंचना भारतीय ऊर्जा तंत्र की लचीली और सुदृढ़ व्यवस्था का एक जीवंत उदाहरण है।
























