ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन पर, रिट याचिकाएं दायर, एक करोड़ रुपये आर्थिक दंड लगाने का अनुरोध: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के वर्ष 2023 में संशोधन के बाद, ध्वनि प्रदूषण नियमों के उल्लंघन पर, रिट याचिकाएं दायर की गईं। संशोधन के बाद कई पर्यावरणीय उल्लंघनों के मामलों में, आपराधिक कार्रवाई के बजाय आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया। इसके लिए अधिनियम में धारा 15C जोड़ी गई, जिसके तहत प्रत्येक राज्य में, एक निर्णायक अधिकारी नियुक्त किया गया है। छत्तीसगढ़ में यह जिम्मेदारी आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव को दी गई है। इनका दायित्व पर्यावरण कानून, नियमों और अधिसूचनाओं के उल्लंघन से जुड़े, मामलों की सुनवाई कर निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, आर्थिक दंड तय करना है।
ध्वनि प्रदूषण नियम
छतीसगढ़ रायपुर के ईएनटी विशेषज्ञ डॉकटर राकेश गुप्ता के अनुसार, वर्ष 2023 में शंकर नगर चौक पर गणेश स्थापना और विसर्जन के दौरान, ध्वनि प्रदूषण नियमों का सात बार उल्लंघन किए जाने पर, शिकायत कर्ता ने प्रत्येक उल्लंघन पर 15 लाख रुपये की पेनल्टी लगाने की मांग की, जिसके आधार पर कुल 1.05 करोड़ रुपये का, आर्थिक दंड लगाने का अनुरोध किया गया। डॉकटर गुप्ता का कहना है कि, निर्णायक अधिकारी ने दोनों मामलों में शिकायतों पर, गुण दोष के आधार पर फैसला देने के बजाय, यह कहते हुए खारिज कर दिया कि, पेनल्टी लगाने की प्रक्रिया अभी निर्धारित नहीं है। ध्वनि प्रदूषण प्राय: होता रहता है क्योंकि शोर-शराबे से प्रभावित होने वाले लोगों में से केवल ५ से १० प्रतिशत ही औपचारिक तौर पर शिकयत (complaint) दर्ज कराते हैं। बहुत से लोगों को अपने कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी की जागरूकता नहीं हैं और वे नहीं जानते हैं कि शिकयत कैसे दर्ज कराई जाती है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में रिट याचिकाएं दायर
इस निर्णय को चुनौती देते हुए, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अलग अलग रिट याचिकाएं दायर की गईं। प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने दोनों मामलों में नोटिस जारी कर निर्णायक अधिकारी से चार सप्ताह के अंदर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। संशोधित पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अनुसार, नियमों के उल्लंघन पर 10 हजार रुपये से लेकर 15 लाख रुपये तक आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। यदि उल्लंघन लगातार जारी रहता है तो प्रतिदिन अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है। यदि किसी सरकारी विभाग द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जाता है तो संबंधित अधिकारी या विभागाध्यक्ष पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। वहीं निर्धारित दंड का भुगतान नहीं करने की स्थिति में तीन वर्ष तक की सजा या दोगुना जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान मौजूद है।



































