पृथ्वी से ब्रह्मांड तक क्रांति, वर्टिकली-इंटीग्रेटेड इनोवेशन इंजन, स्पेसएक्स और xAI के मिशन की एक नई किताब: एलन मस्क
एलन मस्क
तकनीकी दुनिया के सबसे बड़े विजनरी एलन मस्क ने एक ऐसी घोषणा की है जिसने सिलिकॉन वैली से लेकर अंतरिक्ष विज्ञान के गलियारों तक खलबली मचा दी है। मस्क की रॉकेट कंपनी स्पेसएक्स ने उनकी अपनी एआई स्टार्टअप xAI का अधिग्रहण कर लिया है, जिसका उद्देश्य एक ऐसा 'इनोवेशन इंजन' तैयार करना है जो न केवल पृथ्वी पर, बल्कि ब्रह्मांड के स्तर पर क्रांति ला सके। इस विलय का सबसे रोमांचक हिस्सा है अंतरिक्ष में एक सेंशिएंट सन (चेतन सूर्य) का निर्माण करना, जो मानवता की चेतना को सितारों तक ले जाने का वादा करता है।
वर्टिकली-इंटीग्रेटेड इनोवेशन इंजन
एलन मस्क ने जानकारी साझा की है कि स्पेसएक्स ने xAI का अधिग्रहण कर दुनिया का सबसे महत्वाकांक्षी और वर्टिकली-इंटीग्रेटेड इनोवेशन इंजन बनाया है। इसमें एआई, शक्तिशाली रॉकेट, अंतरिक्ष-आधारित इंटरनेट, डायरेक्ट-टू-मोबाइल संचार और दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम सूचना मंच एक साथ काम करेंगे। एलन मस्क के अनुसार, यह केवल एक नया अध्याय नहीं है, बल्कि स्पेसएक्स और xAI के मिशन की एक नई किताब है। हमारा लक्ष्य है एक चेतन सूर्य विकसित करना, ताकि हम ब्रह्मांड को समझ सकें और चेतना के प्रकाश को तारों तक पहुंचा सकें।
अंतरिक्ष-आधारित एआई
एलन मस्क का तर्क है कि वर्तमान एआई विकास पूरी तरह से जमीनी डेटा सेंटर्स पर निर्भर है, जिन्हें चलाने के लिए भारी मात्रा में बिजली और कूलिंग की आवश्यकता होती है। धरती पर बिजली की मांग इतनी बढ़ गई है कि इसे स्थानीय स्तर पर पूरा करना पर्यावरण और समुदायों के लिए कठिन होता जा रहा है। इसका समाधान बताते हुए एलन मस्क ने कहा, दीर्घकालिक रूप से अंतरिक्ष-आधारित एआई ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है। सूर्य की ऊर्जा का एक छोटा सा हिस्सा भी उपयोग करने के लिए हमें वर्तमान सभ्यता की तुलना में लाखों गुना अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होगी।
ऑर्बिटल डेटा सेंटर
इसका समाधान एलन मस्क ने अंतरिक्ष यानी स्पेस में खोजा है। उन्होंने टिप्पणी की, स्पेस को 'स्पेस' इसीलिए कहा जाता है क्योंकि वहां असीमित जगह है। योजना के अनुसार, स्पेसएक्स 10 लाख उपग्रहों का एक समूह लॉन्च करेगा जो ऑर्बिटल डेटा सेंटर के रूप में कार्य करेंगे। यह कदम मानवता को कार्दाशेव स्तर की सभ्यता बनाने की दिशा में पहला चरण होगा, जो अपने सूर्य की पूरी ऊर्जा का उपयोग करने में सक्षम होती है। इससे अरबों लोगों को एआई सेवाएं मिलेंगी और मंगल जैसे ग्रहों पर बस्तियां बसाने का सपना साकार होगा।
























