पोलो का पुनरुद्धार, विश्व के सबसे पुराने पोलो मैदान में टूर्नामेंट का आयोजन: असम राइफल्स
मणिपुरी संस्कृति को बढ़ावा
मणिपुर की राजधानी इंफाल में असम राइफल्स द्वारा पोलो के खेल को पुनर्जीवित करने और मणिपुरी संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। असम राइफल्स ने डायरेक्टर जनरल असम राइफल्स पुरुष और महिला पोलो टूर्नामेंट के दूसरे संस्करण का आयोजन शुरू किया है। इस आयोजन का सबसे खास पहलू यह है कि यह टूर्नामेंट पोलो की जन्मभूमि, मणिपुर में स्थित एशिया के ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े पोलो मैदान में आयोजित किया जा रहा है। मेजर रोहित नायर ने इस पहल पर रोशनी डालते हुए खेल और संस्कृति के पुनरुद्धार में असम राइफल्स की अग्रणी भूमिका पर जोर दिया है।
असम राइफल्स की भूमिका
मेजर रोहित नायर ने DGAR पोलो टूर्नामेंट के दूसरे संस्करण के आयोजन की जानकारी देते हुए असम राइफल्स की भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, "असम राइफल्स डायरेक्टर जनरल असम राइफल्स पुरुष और महिला पोलो टूर्नामेंट का दूसरा संस्करण आयोजित कर रही है।" उन्होंने याद दिलाया कि टूर्नामेंट का पहला संस्करण इसी साल जनवरी-फरवरी में आयोजित किया गया था, जिसे व्यापक सफलता मिली थी। मेजर नायर ने इस बात पर जोर दिया कि असम राइफल्स हमेशा से मणिपुरी संस्कृति को बढ़ावा देने और पुनर्जीवित करने में सबसे आगे रही है, यह पोलो टूर्नामेंट उसी प्रयास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मणिपुर पोलो खेल की जन्मभूमि
इस टूर्नामेंट की सबसे बड़ी खासियत इसका आयोजन स्थल है। मेजर रोहित नायर के अनुसार, असम राइफल्स इस टूर्नामेंट की मेजबानी मणिपुर के सबसे पुराने और सबसे बड़े पोलो मैदान में कर रही है। मणिपुर को पोलो की जन्मभूमि माना जाता है और यह मैदान न केवल एशिया में, बल्कि दुनिया में भी सबसे बड़े पोलो मैदानों में से एक है। मेजर नायर ने कहा कि पोलो, जिसे मणिपुरी भाषा में 'सगोल कंगजेई' कहा जाता है, मणिपुर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का अभिन्न अंग है। असम राइफल्स इस टूर्नामेंट के माध्यम से इस प्राचीन खेल को नई पीढ़ी के बीच पुनर्जीवित कर रही है।
संस्कृति और सामाजिक सद्भाव
असम राइफल्स द्वारा DGAR पोलो टूर्नामेंट का सफल आयोजन यह दर्शाता है कि सुरक्षा बल केवल सीमाओं की रक्षा तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे स्थानीय संस्कृति और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। यह आयोजन मणिपुर में पोलो के स्थानीय स्वरूप को संरक्षित करने के साथ ही खेल प्रतिभाओं को भी एक मंच प्रदान करता है। टूर्नामेंट में पुरुष और महिला दोनों की सहभागिता यह सुनिश्चित करती है कि समाज के सभी वर्गों को सांस्कृतिक पुनरुद्धार के इस प्रयास में शामिल किया जाए। यह आयोजन राज्य में शांति और सामान्य स्थिति की बहाली की दिशा में एक सकारात्मक कदम भी है।
























