प्रयागराज में वैश्य परिवार हत्याकांड, दोस्त गिरफ्तार: उत्तरप्रदेश

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वैश्य परिवार हत्याकांड
प्रयागराज के साउथ मलाका में वैश्य परिवार हत्याकांड में सीसीटीवी फुटेज और कॉल डीटेल अहम साबित हुए। अभिषेक वैश्य और आरोपी शनि गुप्ता के बीच लगातार फोन पर हुई बातचीत ने पुलिस को सीधे हत्यारोपी तक पहुंचा दिया। वारदात से एक सप्ताह के अन्दर अभिषेक और शनि के बीच 15 से अधिक बार बात हुई थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद जब चारों शव बरामद हुए साथ ही शव को बाहर निकालते वक्त आरोपी ने खुद भी मदद की थी। इस दौरान उसके हाथों में पट्टी बंधी थी जो हत्या के दौरान उसे चोट लगी थी, जब पुलिस ने पूछा तो उसने बताया कि उसे कुत्ते ने काट लिया। शुरुआती जांच में परिवार के भीतर विवाद, संपत्ति संबंधी मतभेद और कारोबारी रंजिश समेत कई बिंदु शामिल किए गए।

अभिषेक और शनि ने की तीन हत्याए
रविवार दोपहर अभिषेक ने दोस्त शनि को अपनी दुकान पर बुलाया। दोनों ने साथ बैठकर कचौड़ी खाई। बीयर और सिगरेट पी। इस दौरान परिवार की हत्या कर जेवर लूटने की साजिश रची। शाम करीब पांच बजे रोजाना की तरह मीनाक्षी नीचे दुकान खोलने आई। जैसे ही उसने सीढ़ियों का दरवाजा खोला, अभिषेक ने लोहे की रॉड से उसके सिर पर वार कर दिया। शनि ने उसे धक्का दिया और दोनों उसे घसीटते हुए ऊपर ले गए। गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बहन की हत्या के बाद दोनों ऊपर कमरे में पहुंचे। वहां पिता वीरेंद्र और मां अनीता दोनों सो रहे थे। आरोपियों ने उन पर भी लोहे की रॉड और पाइप से ताबड़तोड़ वार किए। सिर पर गंभीर चोट लगने से दोनों की मौत हो गई। इसके बाद दोनों ने अलमारी खंगाली और घर में रखे जेवर और कीमती सामान समेट लिए। 

चौथी हत्या का अकेला आरोपी शनि गुप्ता
जांच में पता चला कि रविवार शाम छह बजे तक वीरेंद्र वैश्य, उनकी पत्नी अनीता, बेटी मीनाक्षी और बेटे अभिषेक की हत्या हो चुकी थी। इसके बाद वह सोमवार सुबह करीब पांच बजे तक मकान और दुकान के भीतर ही रहा। वैश्य परिवार के चार लोगों की हत्या का आरोपी शनि गुप्ता वारदात के बाद करीब 11 घंटे तक उसी मकान में शवों के बीच रहा। उसने पूरी रात साक्ष्य मिटाए। पूरे घर में घूम-घूमकर कई बार खून के धब्बे साफ किए उसी मकान में नहाया भी। इसके बाद मृतक वीरेंद्र की टी-शर्ट और अभिषेक के जूते पहनकर बाहर निकला। मकान और दुकान में ताला लगाकर चला गया। 

सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और कॉल डिटेल
इसी दौरान जांच टीम ने मृतक अभिषेक वैश्य के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड निकलवाई। सीडीआर मोबाइल की तकनीकी जांच में एक ऐसा नंबर सामने आया जिस पर अभिषेक लगातार संपर्क में था। आखिरी बार भी इसी नंबर से अभिषेक की बात हुई थी। घटनाक्रम के समय को देखते हुए जांच टीम को इस नंबर पर संदेह हुआ। नंबर की पड़ताल की गई तो वह शनि के नाम पर पंजीकृत निकला। पुलिस ने शनि के बारे में स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई। जांच में सामने आया कि शनि वीरेंद्र की मार्केट के पास समोसे कचौड़ी की दुकान चलाता था। उसकी अभिषेक से दोस्ती थी। दोनों अक्सर एक दूसरे की दुकानों पर बैठते थे और शराब भी पीते थे। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की तो सोमवार सुबह पांच बजे एक व्यक्ति मकान से बाहर निकलता दिखाई दिया। स्थानीय लोगों से उसकी पहचान कराई गई तो उन्होंने उसे शनि गुप्ता बताया। इससे पुलिस का संदेह और गहरा हो गया।

हत्या लूट और साक्ष्य
तकनीकी साक्ष्य, कॉल डिटेल और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर शनि को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। थोड़ी देर पुलिस को इधर उधर की बातो में उलझाने के बाद जब सबूत सामने रखे गए तो उसके जवाब उलझने लगे अंततः वह टूट गया और उसने हत्या, लूट और साक्ष्य मिटाने की पूरी कहानी कबूल कर ली। पुलिस ने साउथ मलाका सब्जी मंडी चौराहा स्थित मकान में कारोबारी वीरेंद्र कुमार वैश्य, उनकी पत्नी अनीता, बेटी मीनाक्षी और बेटे अभिषेक की हत्या की गुत्थी 12 घंटे में सुलझा ली। पुलिस का दावा है कि बड़े बेटे अभिषेक ने घर में लूट के इरादे से अपने दोस्त शनि गुप्ता के साथ मिलकर माता-पिता और बहन की हत्या की थी। बाद में डेढ़ करोड़ रुपये के जेवरात के बंटवारे को लेकर हुए विवाद में शनि ने अभिषेक को भी मौत के घाट उतार दिया।

डिटर्जेंट हार्पिक ब्लीचिंग पाउडर हल्दी और सरसों तेल
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि अभिषेक के शव को दुकान के भीतर ही बंद कर दिया, ताकि शव जल्दी नजर न आए और दुर्गंध बाहर न पहुंचे। शवों से उठने वाली दुर्गंध से पड़ोसियों को घटना की जानकारी न हो इसलिए उसने सभी के शवों को कंबल और रजाई से ढक दिया था। अलमारी से कपड़े निकालकर भी शवों के ऊपर डाल दिए थे। चारों हत्याओं के बाद सबसे पहले घर में मौजूद जेवर और नकदी समेटी। इसके बाद शवों के आसपास फैले खून और संघर्ष के निशानों को मिटाने का काम शुरू किया। खून के धब्बे साफ करने के लिए डिटर्जेंट पाउडर, हार्पिक, ब्लीचिंग पाउडर, हल्दी और सरसों के तेल का इस्तेमाल किया। फर्श को कई बार गर्म पानी और डिटर्जेंट से धोया, ताकि खून के दाग और फोरेंसिक साक्ष्य नष्ट हो जाएं। पुलिस को घटनास्थल से पानी में भीगी आरोपी की टी-शर्ट और सफाई में इस्तेमाल किए गए कपड़े मिले। 

सोना चांदी नकदी बरामद
पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने बुधवार को प्रेसवार्ता कर घटना का खुलासा किया। वारदात रविवार शाम पांच से छह बजे के बीच अंजाम दी गई। आरोपी शनि ने पूछताछ में बताया कि अभिषेक पिता से नाराज था। पुलिस आयुक्त के मुताबिक, वर्ष 2022 में पिता ने अभिषेक को भी संपत्ति से बेदखल कर दिया था। अभिषेक कर्ज में डूबा था। उन्होंने बताया कि मुट्ठीगंज निवासी आरोपी शनि को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसके कब्जे से एक किलो सोना, 360 ग्राम चांदी, एक हजार रुपये नकदी और ताले की चाभी बरामद की है।

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