प्रवर्तन निदेशालय (ED) को मिले 331 करोड़ के सुराग, मनी लॉन्ड्रिंग: राजस्थान

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अत्यंत गरीब रैपिडो ड्राइव
शादियों के सीज़न में जब राजस्थान का उदयपुर शहर अपनी शानदार 'डेस्टिनेशन वेडिंग्स' के लिए सुर्खियाँ बटोर रहा था, तभी एक अप्रत्याशित घटना ने एक बड़े और सनसनीखेज ब्लैक मनी रैकेट का पर्दाफाश कर दिया। यह मामला उदयपुर के ताज अरावली रिज़ॉर्ट में हुई एक भव्य शादी से जुड़ा है, जहाँ हुए लेनदेन के बाद जांच एजेंसियों की नज़र एक अत्यंत गरीब रैपिडो ड्राइवर के बैंक खाते पर पड़ी। उस ड्राइवर के खाते में अचानक 331 करोड़ 36 लाख रुपये जमा हुए थे, जो उसकी आय से बिल्कुल मेल नहीं खाते थे। इस असाधारण लेनदेन ने तत्काल प्रवर्तन निदेशालय (ED) को सक्रिय कर दिया, जिसके बाद यह खुलासा हुआ कि यह पैसा एक बड़े अंतरराष्ट्रीय बेटिंग ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट का हिस्सा था।

प्रवर्तन निदेशालय (ED)
ईडी की जांच में यह बात सामने आई कि यह काला धन 1xBet नामक एक बेटिंग ऐप से जुड़ा हुआ था। जांच एजेंसियों को सबसे ज़्यादा हैरानी इस बात पर हुई कि इतनी बड़ी रकम उस गरीब रैपिडो ड्राइवर के बैंक खाते में कुछ ही महीनों के भीतर जमा हुई, जिसकी आय इतनी नहीं थी। जांच में पता चला कि अपराधी इस काले धन को छिपाने के लिए 'म्यूल अकाउंट' का इस्तेमाल कर रहे थे। म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है जिनका उपयोग साइबर ठग मनी लॉन्ड्रिंग के पैसे को छिपाने के लिए करते हैं, ताकि वे स्वयं जांच एजेंसियों की नजरों से बच सकें और अपनी अवैध गतिविधियों को जारी रख सकें।

वैध बैंकिंग प्रणाली
अपराधी अक्सर अपने काले धन को छिपाने के लिए गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाते हैं। ये लोग पैसे की ज़रूरत में होते हैं और अपराधी इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उनके बैंक खातों को म्यूल अकाउंट की तरह इस्तेमाल करते हैं, जिसके बदले में इन गरीब लोगों को भी कुछ छोटी राशि दी जाती है। इस तरह, अपराधी एक छोटे से कमीशन पर अपने अरबों रुपये के काले धन को आसानी से वैध बैंकिंग प्रणाली के माध्यम से घुमाते रहते हैं और खुद को कानूनी कार्रवाई से सुरक्षित रखते हैं।

निर्दोष लोगों को मोहरा
हालांकि, उदयपुर का मामला कई मायनों में चौंकाने वाला था, क्योंकि जांच में यह सामने आया कि रैपिडो ड्राइवर को इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उसके बैंक खाते का इस्तेमाल इस विशाल मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट द्वारा किया जा रहा है। इसका मतलब है कि या तो अपराधियों ने उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग किया, या उसे गुमराह करके खाता खुलवाया। यह मामला यह दर्शाता है कि अपराधी कितने शातिर तरीके से अपने नेटवर्क को अंजाम देते हैं और अपनी अवैध आय, जिसे बाद में ताज अरावली रिज़ॉर्ट जैसी शानदार डेस्टिनेशन वेडिंग में इस्तेमाल किया गया, को छिपाने के लिए निर्दोष लोगों को मोहरा बनाते हैं।

अवैध बेटिंग ऐप्स का जाल
इस बड़े रैकेट के भंडाफोड़ के बाद, जांच एजेंसियाँ अब उन सभी उच्च-स्तरीय संपर्कों और अन्य म्यूल खातों की तलाश कर रही हैं, जिनका उपयोग इस ब्लैक मनी को ठिकाने लगाने के लिए किया गया था। इस मामले ने देश भर में साइबर अपराधों और मनी लॉन्ड्रिंग के गठजोड़ पर गंभीर चिंताएँ पैदा की हैं। यह घटना बताती है कि कैसे अवैध बेटिंग ऐप्स का जाल आम लोगों को भी अनजाने में अपराध का हिस्सा बना सकता है। यह न्यायिक और पुलिस प्रशासन के लिए एक यथार्थवादी चुनौती है कि वे इस तरह के जटिल और डिजिटल अपराधों पर नकेल कसें।

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