मजदूरों के खातों में करोड़ों का अवैध लेनदेन: बैंक प्रबंधन की खामोशी
बैंक ऑफ महाराष्ट्र
उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित बैंक की कृष्णापुरी शाखा से जुड़ा एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने बैंकों की सुरक्षा प्रणाली और कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। साइबर अपराधियों ने एक बड़े अंतर्राज्यीय नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए करोड़ों रुपये की ठगी की रकम को स्थानीय मजदूर वर्ग के लगभग दो दर्जन से अधिक लोगों के बैंक खातों में डाल दिया। यह लेनदेन बिना किसी सतर्कता या सूचना के सितंबर से नवंबर 2025 के बीच चलता रहा।
साजिश का पर्दाफाश
गुजरात की एक कंपनी में कार्यरत मजदूर दिलशाद अपना वेतन निकालने के लिए बैंक पहुंचा और उसे पता चला कि उसका खाता होल्ड हो गया है। बैंक ने उसे बताया कि साइबर ठगी की शिकायत के बाद अरुणाचल प्रदेश की पुलिस ने खाते को होल्ड कराया है। दिलशाद ने हैरानी जताते हुए कहा कि वह सिर्फ मजदूरी करता है और उसके खाते में कभी दस-बीस हजार रुपये से ज्यादा नहीं होते हैं, जबकि पिछले कुछ महीनों में उसके खाते से करीब 64 लाख रुपये का अवैध लेनदेन किया गया था।
दूसरा एटीएम भी जारी
दिलशाद की तरह ही नगला मेवाती गांव के कई मजदूर इस ठगी का शिकार हुए हैं। परवेज ने बताया कि उनके बैंक खाते में भी करीब 44 लाख रुपये भेजे गए और बैंक ने उन्हें बिना कोई जानकारी दिए उनका एटीएम बंद करवाकर दूसरा एटीएम भी जारी कर दिया। वकील खान, तबस्सुम, फरहीन, परवीन, गुड़िया सहित दो दर्जन से अधिक खातेदारों के खातों में भी 30 से 65 लाख रुपये तक की बड़ी राशियां डाली गईं। मजदूरों का आरोप है कि बैंक प्रबंधन ने इतनी बड़ी रकम आने-जाने पर उनसे संपर्क करने या स्थानीय साइबर पुलिस को सूचित करने की जरूरत नहीं समझी।
अरुणाचल प्रदेश की साइबर पुलिस
बैंक ऑफ महाराष्ट्र से संपर्क कर इन संदिग्ध खातों को होल्ड कराया है, जिससे करीब तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी की धनराशि यहां पहुंचने की पुष्टि हुई है। एसपी अपराध अवनीश मिश्रा ने बताया कि मजदूरों के बैंक खातों में साइबर अपराध से ठगी की गई धनराशि पहुंचने की घटना का संज्ञान आया है और इस मामले की हर पहलू से जांच कराई जा रही है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इतनी बड़ी संख्या में संदिग्ध लेनदेन होने पर भी बैंक कर्मचारी कैसे अनजान रहे या फिर उनकी सीधी संलिप्तता है।
बैंक प्रबंधन से कठोरता से पूछताछ
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि नगला मेवाती गांव में वर्ष 2021-22 में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के प्रतिनिधि ने शिविर लगाकर मजदूरों के ये खाते खोले थे। कोतवाली पुलिस ने खाते खुलवाने वाले प्रतिनिधि को भी पूछताछ के लिए बुलाया है। कोतवाली पुलिस का कहना है कि मजदूरों के बयान लिए गए हैं और बैंक के अधिकारी व कर्मचारियों से भी कठोरता से पूछताछ की जाएगी। एसपी अवनीश मिश्रा ने कहा कि बैंक को स्थानीय साइबर पुलिस को सूचना देनी चाहिए थी। बैंक ऑफ महाराष्ट्र के 200 से अधिक खाते अब पुलिस जांच के दायरे में हैं, जिससे गांव के अन्य खातादारों में भी हड़कंप मच गया है।
























