मेहनती किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, मछुआरों और अन्य लोगों के लिए नए अवसर खुलेंगे: अंतरिम ट्रेड एग्रीमेंट
संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत
यह घोषणा करते हुए प्रसन्न हैं कि उन्होंने पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार के संबंध में एक अंतरिम समझौते के लिए एक रूपरेखा तैयार कर ली है।
यह समझौता केवल एक तरफा नहीं है, बल्कि दोनों देशों ने एक-दूसरे को बाजार में बेहतर पहुंच देने का वादा किया है। यह कदम विशेष रूप से उन व्यापारिक तनावों को कम करने के लिए उठाया गया है जो पिछले कुछ वर्षों से आयात शुल्कों को लेकर दोनों देशों के बीच बने हुए थे। भारतीय निर्यातकों को भी अमेरिकी बाजार में कुछ रियायतें मिलने की उम्मीद है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी।
शनिवार को जारी संयुक्त बयान
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे दोनों देशों के लिए बहुत अच्छी खबर बताते हुए कहा कि इससे मेहनती किसानों, उद्यमियों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स, मछुआरों और अन्य लोगों के लिए नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि फ्रेमवर्क निवेश और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप को गहरा करेगा, मजबूत सप्लाई चेन बनाएगा और वैश्विक विकास में योगदान देगा।
इस फैसले पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह समझौता आपसी और फायदेमंद व्यापार के लिए एक मजबूत फ्रेमवर्क तैयार करता है। उन्होंने बताया कि भारत अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) पर बातचीत जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह फ्रेमवर्क भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए ज्यादा मार्केट एक्सेस और नए मौके सुनिश्चित करेगा, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिलेगा।
कॉमर्स और इंडस्ट्री मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह कदम भारत-अमेरिका आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने में मदद करेगा और साझा सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता दिखाता है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करने, भारतीय उद्योग और निर्यातकों को नए अवसर देने और ‘मेक इन इंडिया’ को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम है।
विशेषज्ञों कि राय
विशेषज्ञों का मानना है कि टैरिफ में इस कटौती से अमेरिकी किसानों को दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजार (भारत) में अपनी पैठ बढ़ाने का मौका मिलेगा। वहीं, भारतीय उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता वाले खाद्य उत्पाद किफायती दरों पर उपलब्ध होंगे। यह समझौता भविष्य में एक पूर्ण 'मुक्त व्यापार समझौते' (FTA) की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। सरकार का यह कदम आर्थिक कूटनीति और वैश्विक व्यापार संबंधों में संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
























