राम मंदिर मुख्य शिखर पर केसरिया धर्मध्वज पवन के संग लहराया:अयोध्या
शिखर पर केसरिया धर्मध्वज
अयोध्या के राम मंदिर में एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण तब आया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बटन दबाते ही निर्धारित शुभ मुहूर्त में मंदिर के मुख्य शिखर पर केसरिया धर्मध्वज पवन के संग लहराया। जैसे ही ध्वज ऊपर चढ़ा, पूरा परिसर ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से गूँज उठा और वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। ध्वजारोहण की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही पीएम मोदी के अदब से जुड़े हाथ भावनाओं में बहकर कांपते नजर आए। यह भव्य मंजर बता रहा था कि ना सिर्फ वहां उपस्थित जन-मानस बल्कि अपने घरों से इस कार्यक्रम को लाइव देख रहे आमजन की कितनी भावनाएं इस पल से जुडी हैं। ध्वजारोहण के बाद पीएम मोदी ने अपार जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा बहुत पुराना सपना आज पूरा हुआ है और सदियों पुराने घाव धीरे-धीरे भरने शुरू हो गए हैं।
समाज की सामूहिक शक्ति
पीएम मोदी ने अपने संबोधन में इस ध्वज के महत्व को रेखांकित किया, कहा कि यह ध्वज युगों युगों तक श्री राम के आदेशों और प्रेरणाओं को मानव मात्र तक पहुंचाएगा। उन्होंने विकसित भारत के निर्माण के लिए समाज की सामूहिक शक्ति की आवश्यकता पर जोर दिया और एक ऐसे समाज की स्थापना का आह्वान किया जहां कोई गरीब या पीड़ित न हो। प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक सफलता के लिए हर दानवीर, श्रमवीर, कारीगर, योजनाकार और वास्तुकार का अभिनंदन भी किया। वह इन पलों में भावुक नजर आए और टकटकी लगाए झंडे को ऊपर चढ़ते देखते रहे।
रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष
सर संघचालक मोहन भागवत ने इस अवसर को सार्थकता का दिन बताया और कहा कि इसके लिए जितने लोगों ने प्राण न्योछावर किए, उनकी आत्मा आज तृप्त हुई होगी और अशोक जी को भी शांति मिली होगी। उन्होंने बताया कि आज मंदिर पर जो राम राज्य का ध्वज फहराया गया है, उस भगवा ध्वज पर रघुकुल का प्रतीक कोविदार वृक्ष अंकित है। यह वह वृक्ष है जो सबके लिए छाया देता है, स्वयं धूप में खड़ा रहकर, और फल भी दूसरों के लिए देता है।
केसरिया ध्वज नए भारत का प्रतीक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन में भी एक नई उर्जा दिखाई दी। उन्होंने कहा कि मंदिर के शिखर पर फहरा रहा यह केसरिया ध्वज नए भारत का प्रतीक है। सीएम ने इस बात पर जोर दिया कि 500 वर्षों में समय बदला, नेतृत्व बदला, लेकिन आस्था न झुकी और न रुकी। उन्होंने पुराने संकल्प को याद करते हुए कहा कि जब आरएसएस के हाथों में कमान आई तो सिर्फ एक ही आवाज गूंजती रही थी रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे।
सनातन परंपरा की अखंडता और सांस्कृतिक स्वाभिमान
ध्वजारोहण समारोह निर्धारित शुभ मुहूर्त में हुआ, जिससे पहले वैदिक मंत्रोच्चार के बीच व्यापक पूजन-अर्चन सम्पन्न किया गया। यज्ञकुंडों से उठती आहुतियों की सुगंध और नगाड़ों की गूँज ने पूरे समारोह को भव्यता प्रदान की। ध्वजारोहण के समय सामने की कतार में बैठे साधु-संत भी भावुकता में अपने आंसू पोंछते हुए नजर आए। पीएम मोदी ने यह ध्वजारोहण कर राष्ट्र को सनातन परंपरा की अखंडता और सांस्कृतिक स्वाभिमान का संदेश दिया।
सरयू तट पर दीप, पुष्प और रंगोलियों से सजा माहौल
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में देश-दुनिया के करीब आठ हजार लोग आमंत्रित किए गए थे, जिनमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, धर्मगुरु, व्यापार जगत के प्रमुख नाम, दलित, वंचित, किन्नर और अघोरी समुदाय के प्रतिनिधि शामिल रहे। मंदिर परिसर से लेकर सरयू तट तक हर ओर दीप, पुष्प और रंगोलियों से सजा माहौल इस उत्सव का साक्षात अनुभव करा रहा था। भागवत ने सूर्य भगवान को संकल्प का प्रतीक बताया और कहा कि जैसा सपना उन लोगों ने देखा था, उससे भी भव्य मंदिर बन गया है।
























