श्रद्धालुओं ने की धर्मलाभ प्राप्ति, विश्व शांति की कामना: सिद्धारूढ़ मठ दीपोत्सव
श्री सिद्धारूढ़ मठ (Sri Siddharudhar Mutt)
कर्नाटक के हुबली स्थित श्री सिद्धारूढ़ मठ (Sri Siddharudhar Mutt) में कार्तिक महीने के पावन अवसर पर आयोजित लक्ष दीपोत्सव ने एक दिव्य और अद्वितीय आध्यात्मिक माहौल तैयार किया। यह दीपोत्सव कार्तिक मास के अंतिम चरण में पड़ता है, जिसे दीपावली के बाद भी दीयों का पर्व माना जाता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर धर्मलाभ लिया और मठ के संपूर्ण परिसर को लाखों दीयों से जगमगा दिया। मठ की आध्यात्मिक परंपरा का यह उत्सव भक्तों को असीम शांति और आस्था प्रदान करता है।
अक्षय पुण्य की प्राप्ति दीपदान
श्री सिद्धारूढ़ मठ में लक्ष दीपोत्सव का आयोजन एक प्राचीन परंपरा है, जो कार्तिक मास की महानता को दर्शाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक माह में दीपदान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। मठ के पूरे परिसर को लाखों मिट्टी के दीयों और रंगोली से सजाया गया था, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं देवताओं ने आकर दीपमाला प्रज्वलित की हो। लक्ष दीपोत्सव में शामिल होने के लिए कर्नाटक और आसपास के राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु हुबली पहुँचते हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा सुनिश्चित
इस दीपोत्सव के दौरान सिद्धारूढ़ स्वामी महाराज को विशेष पूजा अर्पित की जाती है और भक्तों द्वारा अखंड भजन कीर्तन का आयोजन किया जाता है। यह मठ सिद्धारूढ़ स्वामी की शिक्षाओं और उनके द्वारा स्थापित सामाजिक सद्भाव की परंपरा को आगे बढ़ाता है। भक्तगण मठ के चारों ओर दीपक जलाकर परिक्रमा करते हैं और पुण्य की प्राप्ति के लिए विशेष प्रार्थना करते हैं। मठ प्रबंधन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक सुरक्षा एवं व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है।
समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत
श्री सिद्धारूढ़ मठ, हुबली में आयोजित यह लक्ष दीपोत्सव कर्नाटक की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का एक प्रतीक है। यह आयोजन अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान, और बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश को दृढ़ता से स्थापित करता है। यह पर्व न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि सामुदायिक जुड़ाव और प्रेम को भी बढ़ावा देता है। इस दौरान दान-पुण्य और समाज सेवा के कार्य भी किए जाते हैं।
























