सन् १६१० में डच व्यापारी चीन से चाय यूरोप ले गए और धीरे-धीरे ये समूची दुनिया का प्रिय पेय पदार्थ बन गया: चाय पीने की परंपरा
भारतीय बौद्ध भिक्षु
भारतीय बौद्ध भिक्षु बोधिधर्म कथा के अनुसार छठवीं शताब्दी में चीन के हुनान प्रांत में बिना सोए ध्यान साधना करते थे। वे जागे रहने के लिए एक ख़ास पौधे की पत्तियां चबाते थे और बाद में यही पौधा चाय के पौधे के रूप में पहचाना गया। एक दिन चीन के सम्राट शैन नुंग के रखे हुए गर्म पानी के प्याले में, हवा के ज़रिये उड़कर कुछ सूखी पत्तियाँ आकर उसमे गिर गयी, जिनसे पानी में रंग आया और जब उन्होंने उसकी चुस्की ली तो उन्हें उसका स्वाद बहुत पसंद आया। बस यहीं से शुरू होता है चाय का सफ़र। ये बात ईसा से २७३७ साल पहले की है।
१८३५ में असम में चाय के बाग़
सन् ३५० में चाय पीने की परंपरा का पहला उल्लेख मिलता है। सन् १६१० में डच व्यापारी चीन से चाय यूरोप ले गए और धीरे-धीरे ये समूची दुनिया का प्रिय पेय पदार्थ बन गया। अंग्रेज़ यात्रियों का ध्यान असम में उगने वाली चाय की झाड़ियों पर गया जिससे स्थानीय क़बाइली लोग एक पेय बनाकर पीते थे। भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड बैंटिक ने १८३४ में चाय की परंपरा भारत में शुरू करने और उसका उत्पादन करने की संभावना तलाश करने के लिए एक समिति का गठन किया। इसके बाद १८३५ में असम में चाय के बाग़ लगाए गए।
फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी
नेपाल व अन्य देशों से आने वाली इंपोर्टेड चाय की जांच पर, भारत के सख्त नियमों के कारण नेपाल और भारत दोनों देशों के, व्यापारिक रिश्तों में तनाव बना हुआ है। भारत के साथ शुरू हुए विवाद की वजह से नेपाल का पूरा चाय उद्योग ठप पड़ गया है। भारत की फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी FSSAI ने 23 जून को एक निर्देश जारी किया था। इसमें HSN कोड 0902 के तहत आने वाली इंपोर्टेड चाय के लिए रिस् बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम शुरू किया गया। नए नियम के तहत घरेलू खपत के लिए आने वाली चाय की 20 प्रतिशत खेप को, तत्काल प्रभाव से लैब टेस्टिंग के लिए रैंडम तरीके से चुना जाएगा। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक नेपाली चाय एक्सपोर्टर्स पहले से ही भारतीय सीमा पर लंबी देरी का सामना कर रहे हैं, जहां लैब टेस्टिंग के लिए शिपमेंट रोके गए हैं।
नेपाल की चाय फैक्ट्रियां
इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि, अभी भारत के गोदामों में करीब 3,00,000 किलोग्राम प्रोसेस्ड चाय फंसी हुई है, जबकि 10 लाख किलोग्राम से ज्यादा चाय नेपाल में जमा है। इलाम में चाय प्रोसेसर्स ने 15 जून से अपनी फैक्ट्रियां बंद कर दीं और, उसके बाद झापा में प्रोड्यूसर्स ने 18 जून को फैक्ट्रियां बंद करने का फैसला किया। भारत के फैसले से पूर्वी नेपाल में करीब 99 चाय फैक्ट्रियां प्रभावित हुईं और, 50 से ज्यादा छोटे बड़े चाय बागानों में कामकाज रुक गया, जिससे हार्वेस्टिंग में बाधा आई और हजारों मजदूर बेरोजगार हो गये। नेपाल के प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद कार्यालय से यह भरोसा मिलने के बाद कि, सरकार एक्सपोर्ट की रुकावट को दूर करने के लिए तुरंत डिप्लोमैटिक और एडमिनिस्ट्रेटिव कदम उठाएगी, फैक्ट्री मालिकों ने कामकाज फिर से शुरू करने पर सहमति जताई है।





























