स्वतंत्रता, समानता और न्याय की नींव को मजबूत करना सबसे महत्वपूर्ण: संविधान दिवस
26 नवंबर संविधान दिवस
भारत हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाता है, क्योंकि इसी दिन वर्ष 1949 में हमारी संविधान सभा ने औपचारिक रूप से देश के संविधान को अंगीकृत किया था। यह दिवस हमें न केवल संविधान द्वारा दिए गए मूलभूत अधिकारों की याद दिलाता है, बल्कि इसके साथ ही हमें उन कर्तव्यों का भी स्मरण कराता है जिन्हें पूरा करना हर नागरिक का दायित्व है। आज के समय में, जब देश में विविधता बढ़ रही है, तब बंधुत्व (Fraternity) की भावना को समझना और उसे अपने जीवन में उतारना सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।
भारतीय संविधान का मूल सिद्धांत
नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता और समानता सुनिश्चित करना है। जहां संविधान के भाग III में दिए गए मौलिक अधिकार नागरिक को राज्य की मनमानी से सुरक्षा प्रदान करते हैं, वहीं भाग IVA में शामिल मौलिक कर्तव्य नागरिक को समाज और राष्ट्र के प्रति उसकी जिम्मेदारी का एहसास कराते हैं। ये अधिकार और कर्तव्य एक दूसरे के पूरक हैं, और एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए आवश्यक हैं। अधिकारों की मांग करने के साथ-साथ हमें अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन भी करना चाहिए।
संविधान की प्रस्तावना में बंधुत्व (Fraternity)
सर्वाधिक महत्वपूर्ण घटक माना गया है। बंधुत्व का अर्थ है देश के सभी नागरिकों के बीच भाईचारे और एकता की भावना। डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने स्पष्ट किया था कि स्वतंत्रता और समानता, बंधुत्व के बिना अधूरे हैं। उनका मानना था कि बंधुत्व एक ऐसा आधार है, जो सामाजिक और आर्थिक समानता लाने के लिए आवश्यक है और देश की क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय एकता को सुरक्षित करता है।
संस्कृति और मान्यताओं का सम्मान
आज के समय में, जब सांप्रदायिक और जातिगत तनाव बढ़ता जा रहा है, बंधुत्व की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस होती है। यह भावना हमें विविधता को एकजुटता के रूप में देखने और एक दूसरे की संस्कृति और मान्यताओं का सम्मान करने के लिए प्रेरित करती है। यह हमें एक समग्र और समावेशी समाज बनाने की प्रेरणा देती है, जहां किसी भी नागरिक के साथ धर्म, जाति या लिंग के आधार पर भेदभाव न हो।
राष्ट्रीय विकास और जीने का अधिकार
सच्चा लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है; यह बंधुत्व और सामाजिक सद्भाव पर आधारित है। एक नागरिक के रूप में हमारा यह कर्तव्य है कि हम संविधान में दिए गए आदर्शों को केवल पढ़े नहीं, बल्कि उन्हें अपने दैनिक जीवन में उतारें। बंधुत्व को बढ़ावा देकर ही हम एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं, जहां प्रत्येक व्यक्ति को न केवल सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिले, बल्कि वे राष्ट्रीय विकास में समान रूप से योगदान भी दे सकें।
संविधान एक जीवंत दस्तावेज
आज संविधान दिवस के अवसर पर, हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम एक ऐसे भारत के निर्माण के लिए काम करेंगे जहां नागरिकों के अधिकारों का सम्मान हो, वे अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक हों, और बंधुत्व की भावना सर्वोपरि हो। न्याय, स्वतंत्रता और समानता के साथ-साथ बंधुत्व का यह भाव ही हमारे संविधान को विश्व में अद्वितीय बनाता है। हमें यह याद रखना होगा कि संविधान एक जीवंत दस्तावेज है, जो हमेशा नागरिकों से जागरूकता और सहयोग की मांग करता है।
























